गावगंगेकाठी।दोघे बसायचे।
आणि बोलायचे। मनातले।।१।।
येणारे जाणारे। चोरून पाहत।
आणि ठरवत। अपराधी।।२।।
निर्विकार भाव। निष्पाप जिवांचे।
उदक गंगेचे।जणू काही।।३।।
एक दुस-याचे। श्वास कधी झाले।
नाही समजले।परस्परा।।४।।
इमानदारीला। प्रमाण मानले।
पारखे न झाले।सदाचारा।।५।।
सुगंधी क्षणांना। हृदयी जपले।
जरी मार्ग झाले। वेगळाले।।६।।
दोघांच्या अंतरी। होती एक आस।
लाभो सहवास। जन्मोजन्मी।।७।।
– डॉ.गजानन घोंगटे,
वनोजा
९८२२४ ०६११५